रत्नमंजरी: जन्म तथा सिंहासन प्राप्ति-सिंहासन बत्तीसी पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहा…
चन्द्रकला: पुरुषार्थ और भाग्य में कौन बड़ा!-सिंहासन बत्तीसी तीसरी पुतली चन्द्रकला ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार ह…
कौमुदी: विक्रमादित्य और पिशाचिनी-सिंहासन बत्तीसी सातवीं पुतली कौमुदी ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- एक दिन …
पुष्पवती: विक्रमादित्य और काठ का घोड़ा-सिंहासन बत्तीसी आठवीं पुतली पुष्पवती की कथा इस प्रकार है- राजा विक्रम…
मधुमालती: विक्रमादित्य और प्रजा का हित-सिंहासन बत्तीसी नवीं पुतली - मधुमालती ने जो कथा सुनाई उससे विक्रमादित्य…
त्रिलोचना: देवताओं का आवाहन-सिंहासन बत्तीसी ग्यारहवीं पुतली - त्रिलोचना ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- राजा…
पद्मावती: राक्षस से घमासान युद्ध-सिंहासन बत्तीसी बारहवी पुतली - पद्मावती उस सिंहासन की बारहवीं पुतली थी उसने ज…
कीर्तिमती: विक्रमादित्य और सर्वश्रेष्ठ दानवीर-सिंहासन बत्तीसी तेरहवीं पुतली - कीर्तिमती ने इस प्रकार कथा कही- …
सुनयना: हिंसक सिंह का शिकार-सिंहासन बत्तीसी चौदहवीं पुतली - सुनयना ने जो कथा की वह इस प्रकार है- राजा विक्…
सुंदरवती: राजा की हर चीज़ प्रजा के हित के लिए-सिंहासन बत्तीसी पन्द्रहवीं पुतली - सुंदरवती की कथा इस प्रकार है- …
सत्यवती: पाताल लोक की यात्रा-सिंहासन बत्तीसी सोलहवीं पुतली - सत्यवती ने जो कथा कही वह इस प्रकार है- राजा व…
विद्यावती: विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना-सिंहासन बत्तीसी सत्रहवीं पुतली - विद्यावती ने जो कथा कही …
तारामती: विद्वानों तथा कलाकारों का सम्मान-सिंहासन बत्तीसी अठारहवीं पुतली - तारामती की कथा इस प्रकार है- राजा…
रूपरेखा: राजा विक्रमादित्य और दो तपस्वी-सिंहासन बत्तीसी उन्नीसवी पुतली - रूपरेखा नामक उन्नीसवी पुतली ने जो कथा स…
ज्ञानवती: ज्ञानियों की कद्र-सिंहासन बत्तीसी बीसवीं पुतली - ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक…
रविभामा: विक्रमादित्य की परीक्षा-सिंहासन बत्तीसी छठी पुतली रविभामा ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है: एक दिन व…
लीलावती: विक्रमादित्य की दानवीरता-सिंहासन बत्तीसी पाँचवीं पुतली - लीलावती ने भी राजा भोज को विक्रमादित्य के बारे…
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